Wednesday, April 15, 2020

बच्चों की मनोरंजक नयी हिंदी कहानियाँ घमंडी का बाग | Bachoo ki Manoranjak Nayi Hindi Kahaniya Ghamandi ka Baag

 हिंदी कहानियाँ घमंडी का बाग जो लोग घमंडी होते है, उनके जीवन में सुख नहीं होता | जीवन में खुश वाही लोग होते है जो दुसरे से जलते नहीं, कभी घमंड नहीं करते, दुसरो को खुश देख कर उनको ख़ुशी होती है | घमंडी लोग किसी के सगे नहीं होते, वो सिर्फ खुद का सोचते है, इसलिए जीवन के सुख से वंचित रहते है |

 बच्चों की मनोरंजक नयी हिंदी कहानियाँ घमंडी का बाग | Bachoo ki Manoranjak Nayi Hindi Kahaniya Ghamandi ka Baag

 हिंदी कहानियाँ घमंडी का बाग

यह कहानी है, एक ऐसे घामदी आदमी कि जो बहुत घमंडी था | जिस दिन उसे उसे यह ऐसाह हुआ की घमंडी लोग कभी खुश नहीं होते, उसने अपना घमंड छोड़ कर प्यार का रास्ता अपनाया | जैसे ही उसने अपने अंदर से घमंड को त्यागा वैसे ही उसके जिंदगी में ख़ुशी आई और वह हमेशा के लिए खुश रहने लगा |

एक गाव में श्याम नाम का एक आदमी रहता था | वह बहुत आमिर था, उसका घर बहुत बड़ा था | उसके पास फूलो का बहुत बड़ा बागीचा था | वह अकेला रहता था और किसी से भी बाते नहीं करता था | 

उसके इस बात का घमंड था की उसके जैसा फूलो का बगीचा गाव में किसी के पास नहीं है | जिसकी वजह से वह किसी को भी अपने फूलो के बगीचों में नहीं जाने देता था | गाव के बच्चो को फूलो का बगीचा बहुत पसंद था वो सभी बच्चे चोरी चुपके बगीचे में जाया करते थे |

बगीचे में घमंडी आदमी को आते देख कर वह से सभी बच्चे भाग जाते थे | घमंडी बच्चो से नफरत करता था, और वह नहीं चाहत था, कि उसके बगीचे में कोई भी आये | लेकिन बच्चे कैसे बभी कर के वह आ कर खेलते थे, और पेड़ के फाल तोड़ कर खाते थे |

एक दिन घमंडी को बहुत गुस्सा आया और उसने अपने बगीचे के चारो तरफ दीवार का घेरा बना दिया | बगीचे को चारो तरफ से घेर दिया जिससे उसके बगीचे में कोई भी बच्चे नहीं आ पते थे | घमंडी को लगा की उसकी साडी मुसीबते चली गयी |

समय बीता और बसंत का मौसम आया | सभी के पेड़ पर फल आ गए थे, चारो तरफ फूल थे लेकिन घमंडी के बागीचे में कोई फूल नहीं खिल था | उसे समझ नहीं आ रहा था की उसके बगिहे में क्या हुआ | दिन बीतते गए और घमंडी को उन  बछो की याद आने लगी |

घमंडी अपने बगीचे में उन बच्चो की आवाज, उनके खेल और बाते सभी को याद करने लगा | घमंडी को इस बात का एहसास हुआ की इतन बड़ा बागीचा किस काम का अगर ये किसी के आम न आये | अगले दिन घमंडी ने अपने बागीचे के दीवार को गिरा दिया |

एक दिन घमंडी सोया था, तभी उसे बच्चो के खेलने की आवाज आई | घमंडी बहार बगीचे में गया और वह वह बछो को देख कर बहुत खुश हुआ | उसे देख अ बच्चे भागने लगे, लेकिन एक छोटा बच्च भागते हुए गिर गया | घमंडी ने उसे उठाया और प्यार से उसे बगीचे के फल खाने को दिए |

उसे देख सभी बच्चे उसके पास आये और घमंडी उन सभी बच्चो के साथ खेलने लगा | और वह बहुत खुश रहने लगा | देखते-देखते उसके बगीचे में फूल खिलने लगे और सब कुछ पहले जैसा हो गया |

घमंडी यह बात समझ गया था, की ये सब खुच उसके घमंड छोड़ने का नतीजा है | जहा सब लोग खुश होते है, वह ख़ुशी और सुख का भाव होता है |

सिख : हिंदी कहानियाँ घमंडी का बाग इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें कभी भी किसी चीज़ का घमंड नहीं करना चाहिए | हमारे पास जो है उसे सभी के साथ बाट कर खुश रहना चाहिए | हमें कभी भी अपने जीवन में घमंड,नफरत, जलन, लालच, इत्यादि जैसे भाव को नहीं पालना चाहिए |

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