Friday, April 24, 2020

बचपन का सच्चा प्यार की कहानी हिंदी । Bachpan ka saccha pyaar true love story in Hindi

बचपन का सच्चा प्यार की कहानी हिंदी, प्यार तो सभी करते है लेकिन सच्चा प्यार वही है, जिस प्यार में एक दूसरे का सम्मान, आदर और एक दूसरे के ख़ुशी के लिए खुद की कुर्बानी हो वही होता है सच्चा प्यार

आज की दुनिया में सच्चा प्यार एक मजाक बन कर रह गया है । लोग सच्चे प्यार की परिभाषा ही नही जनते । आज की दुनिया में सच्चे प्यार के नाम पर धोखा, दर्द, घमंड, झूट, और लालच देखने को मिलता है ।
बचपन का सच्चा प्यार की कहानी हिंदी । Bachpan ka saccha pyaar true love story in Hindi
बचपन का सच्चा प्यार


बचपन का सच्चा प्यार की कहानी हिंदी


सच्चे प्यार की कहानी हम जानेंगे कि सच्चे प्यार की असली परिभाषा क्या होती है, और सच्चा प्यार किसे कहते है। जो मिल जाये उसे सच्चा प्यार कहते है या जिसे खुश देखने के लिए सब कुछ कुर्बान कर देना वो होता है सच्चा प्यार

एक बार की बात है एक गांव में सूबेदार नाम का एक लड़का रहता था । सूबेदार की उम्र सिर्फ 10 साल की थी जब उसे अपने गांव में एक लड़की पसंद आ जाती है । सूबेदार हर सुबह 5 बजे उठ कर उस लड़की को देखने के लिए दूध की दुकान पर जाया करता था ।

लड़की हर सुबह दूध लेने जाती थी और सूबेदार उसकी एक   झलक पाने के लिए सुबह जैसी उठ जाता था। बचपन का प्यार बहुत ही मासूम और सच्चा होता है, उस बचपन के सच्चे प्यार में कोई लालसह नही होती सिर्फ प्यार होता है ।


समय के साथ-साथ दोनी एक दूसरे से बाते करने लगे और एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए । लड़की के लिए सूबेदार उसका बहुत अच्छा दोस्त था, लेकिन सूबेदार के लिए वह  एक दोस्त से बढ़ कर थी । न जाने कब सूबेदार की दोस्ती प्यार ने बदल गयी । बहुत अच्छे दोस्त अब एक दूसरे से सच्चा प्यार करने वाले बन गए थे ।

एक दिन सूबेदार ने उस लड़की को सुबह दूध की दुकान पर पूछा मुझसे शादी करोगी । लड़की बिना कुछ बोले हस्ते हुए  वहाँ से चली जाती है । सूबेदार को कुछ समझ नही आता फिर वह सोचता है कि कल सुबह वह अपने सवाल का जवाब  लड़की से पूछेगा ।

अगले दिन जब सूबेदार दूध की दुकान पर जाता है, तो वह लड़की वहां नही आई होती है । सुबेद 4 घंटे िनत3ज़ार करता है लेकिन लड़की नही आती । सूबेदार बहुत दुखी हो जाता है । अगले दिन भी लड़की नही आती सूबेदार समझ नही पाता कि वह क्यों नही आ रहे है उसे कुछ हो तो नही गया ।

देखते-देखते कई साल निकल जाते है और सूबेदार उस लड़की से वापस कभी नही मिल पाता । बचपन का जो सच्चा प्यार आ दिया जो सूबेदार के भीतर था वह उसे दिल मे कही न कही अभी भी जल रहा है ।

10 साल बाद सूबेदार 20 साल का हो जाता है और एक देश का जवान बन जाता है । अब उसका सिर्फ एक ही मकशद होता है, की उसे अपने देश के लिए सब कुछ न्यौछावर कर  देना है । सूबेदार अपनी पुरानी जिंदगी भूल कर आज की जिंदगी पर ध्यान देता है ।

जिंदगी भी हमारा बहुत कठिन इम्तेहान लेती है । जैसे ही सूबेदार फौजी बनता है, वैसे ही ही देश की लड़ाई सुरु हो जाती है । और सूबेदार अपनी देश की रक्षा करने के लिए बॉर्डर पर चल जाता है ।


लड़ाई के एक दिन पहले सूबेदार अपने सैन्य प्रमुख में मिलने उनके घर जाता है । सैन्य प्रमुख सूबेदार को लड़ाई के सभी जरूरी बातें बताते है और सूबेदार से बोलतेहै की हम यह लड़ाई जरूर जीतेंगे । बाते खत्म हो जाने पर सूबेदार जाने लगता है तभी सैन्य प्रमुख की पत्नी सूबेदार को बुलाती है कुछ बाते करने के लीए ।

सैन्य प्रमुख की पत्नी सूबेदार को बोलती है कि मैं तुम्हे जानती हूं तुम सूबेदार । सूबेदार समझ नही पता कि सैन्य प्रमुख की ओएटनी मुझे कैसे जानती है । उसकी पत्नी बोलती है, मैं वही दूध वाली लड़की हु जिससे तुम्हे बहुत प्यार था । इतनी बात सुनकर सूबेदार सुन्न से पैड जाता है ।

सूबेदार बहुत खुश होता, उसकी पत्नी सूबेदार को बताती है कि उस दिन जब तुमने शादी के लिए पूछा था । उसी दिन हज मैं गाव छोड़कर दूसरे गांव में चली गयी थी इसलिए गहरे सवाल का जवाब नही दे पाई ।

सैन्य प्रमुख की पत्नी सूबेदार से बोलती है कि मुझसे एक वादा करो । सूबेदार समझ नही आता कैसा वादा, उसकी पत्नी बोलती है अगर तुमने कभी भज मुझसे सच्चा प्यार किया होगा तो तुम मुझसे वादा करो इस लड़ाई में तुम मेरे पति और बेटे को मरने नही दोगे ।

सूबेदार मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखता है और वादा करता है , कुछ भी हो जाये मैं तुम्हारे बेटे और पति को कुछ होने नही दूंगा इस लड़ाई में अगर उसके लिए मुझे अपनी जान भी देनी पड़ी टॉमी उससे पीछे नही हटूँगा । पहली बार तुमने मुझसे कुछ। मांग है और अपने प्यार के लिए मैं वादा करता हु तुम्हारे पति और बेटे लड़ाई खत्म होने के बाद ज़िंदा तुम्हारे पास आएंगे ।

अगली सुबह लड़ाई सुरु हो जाती है, और बहुत ही घमसान लड़ाई होती है । लड़ाई लगातार 3 दिन तक छाती है । 3 बाद ऐसा लग की सूबेदार यह लड़ाई हार जाएगा । तभी उसे अपना किया हुआ वादा याद आता है, और सूबेदार सैन्य प्रमुख से बोलता है। की सामने से हम कभी नही जीत पाएंगे ऐसे हुम् सभी मार जाएंगे । इसलिए किसी को पीछे पहाड़ी ऊपर जाकर दुश्मन के ठिकाने को उड़ाना होगा ।

3 दिन लगातार लड़ाई के बाद सब थक जाते है, और किसी की पास इतनी हिमायत नही होती कि कोई 300 फिट की पहाड़ी चाड सके । सूबेदार बोलता बोलता है कि मैं जाऊंगा अकेले आप लोग सिर्फ उनका ध्यान भटका कर रखना । सभी लोग सूबेदार की बात मान लेते है और सूबेदार पीछे से 300 फ़ीट की पहाड़ी चढ़ना सुरु कर देता है ।

दुश्मन बहुत ही किसी चालाक होते है , वो लोग सोचते है है कि हम सभी आगे से लड़ाई कर रहे है कही कोई पीछे से तो नही आ रहा । तभी कुछ लोग पीछे से सुनदर को आते हुए देख लेते है और गोली चलते है । एक गोली सूबेदार को लग जाती है लेकिन सूबेदार हार नही मानता वह वही छुओ जाता है ।

दुश्मन को लगता है सूबेदार मार जाता है, लेकिन सूबेदार धीरे धीरे उप्पेर चढ़ता जाता है । उप्पेर चढ़ते ही 8 बम से सूबेदार दुश्मन के 8 के 8 बेस उड़ा देता है । जिससे दुश्मन की शक्ति खत्म हो जाती है । सभी दुश्मन सूबेदार को गोली मारने लगते है। आगे से सेना भी हमला कर देती है और सभी दुश्मन को मारकर लड़ाई जीत जाते है ।

इस लड़ाई में सूबेदार को 36 गोली लगी हुई होती है, सूबेदार सांसे लेते रहता है । जब सैन्य प्रमुख उसके पास आता है तो सूबेदार सैन्य प्रमुख से बोलता है कि अपनी पत्नी से बोलना मैन अपना वादा पूरा किया हुम् हुम् लड़ाई जीत गए और सभी लोग सलामत है । इतना बोल कर सुबेद  अपना डैम तोड़ देता है और हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कर देता है ।

मरते मरते सूबेदार पूरी दुनिया को यह बात बताते जाता है है कि सच्चा प्यार वही होता है जाना एक दूसरे के खुशी के लिए खुद कक भी कुर्बान करने से हम पीछे नही हटे । किसिस को पा लेना ही सच्चा प्यार नही होता, बल्कि उसे हमेशा खुश देखना ही सच्चा प्यार की निशानी होती है ।

सिख : बचपन का सच्चा प्यार की कहानी हिंदी हमे प्यार का अर्थ पता चकता है । प्यार तो सभी करते है लेकिन जो प्यार में दूसरे के लिए खुद को कुर्बान कर दे ऐसा सच्चा प्यार लाखो में कोई एक ही करता है ।

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