Sunday, April 12, 2020

माँ का प्यार सच्ची कहानी हिंदी | Maa Ka Pyaar Sachhi Kahani In Hindi

माँ का प्यार सच्ची कहानी हिंदी प्यार की कहानिया दिल से जुडी कहानिया होती है | कहनिया जो हमारे दिल को छु जाती है ऐसी कहानिया होती है प्यार  की कहानिया छोटे से बड़े लोग सभी को पसंद आती है प्यार  की कहानिया | प्यार  तो बहुत प्रकार के होते लेकिन उन सभी प्यार में माँ और बेटे का प्यार  सबसे सुद्ध और प्यारा होता है |

माँ और बेटे के प्यार  में कोई हानी-लाभ का भाव नहीं होता | उस प्यार  में एक दुसरे का आदर और सम्मान ही होता है | ऐसे ही एक कहानी है एक माँ और बेटे के अटूट रिश्ते की जिसे पढने पर आपका हृदय परिवर्तन हो जायेगा |

माँ का प्यार सच्ची कहानी हिंदी | Maa Ka Pyaar Sachhi Kahani In Hindi

माँ का प्यार सच्ची कहानी हिंदी

 माँ का प्यार  जब में 6 महीने का था तभी मेरे पिता का देहांत हो गया था | मेरा परिवार बहुत गरीब था, हमे दो वक़्त की रोटी मिलना भी मुस्किल होता था | उस वक़्त मेरी माँ ने बहुत संघर्ष करके मुझे आज इतना बड़ा आदमी बनाया है | दुनिया में माँ से बड़ा कुछ नहीं होता खुद भगवान भी नहीं होते |

मेले का दिन था, सभी लोग सुबह उठ कर नए नए कपडे पहनकर आकर पैसे लेके मेले में जाने के लिए तैयार थे | मेला देखने मुझे भी जाना था लेकिन मेरे पास पसिसे नहीं थे | मेरी माँ सिलाई का काम करती थी बहुत मुस्किलो से वो मेरा और अपना पेट पलती थी |

मेले के दिन मुझे उदास देखकर उनसे रहा नहीं गया | वह दुसरो के घर गयी और उनके काम  कर माँ ने मुझे 5 पैसा लाकर दिया | और कहा बेटे जाओ तुमभी मेला देख कर आओ | मेरी माँ के हसी के पीछे का दर्द मई समझ सकता था | मेरी माँ भी मुझे वो सभी सुख देना छाती थी जो दुसरे लड़के को मिलते है |

मेरे कुछ दोस्त मरे घर आये, और उनके साथ मई मेला देखने चला गया | मेला बहुत बड़ा था वह पर बहुत सारे नयी चीज़े देखने के लिए थी | मेले में मैंने मेरे दोस्तों के साथ बहुत मस्ती किया | मेरे दोस्तों के पास बहुत पैसे थे उन्हें जो पसदं आता वो लोह उसे लेलेते थे |

उन्होंने ने मेले से बहुत सरे मिटटी के खिलोने लिए और सब लोग अपने खिलोने सभी को दिखा रहे थे | तभी मेरी नज़र एक चमचे पर पड़ी | लोहा का चमचा मुझे बहुत पसदं आया | मैंने दुकानदार से पूछा ये चमचा कितने का है | दुकानदार ने कहा 10 पैसा का है, और मेरे पास सिर्फ 5 पैसे ही थी |

मैंने दुकानदार से कहा 5 पैसा का दोगे, दुकानदार ने बहुत सोचने के बाद वो चमचा मुझे 5 पैसा का दे दिया | चमचा लेकर मई अपने दोस्तों को दिखने ले गया वो सभी मुझपर हसने लगे और कहने लगे ये चमचा क्यों ले लिए?

उस वक़्त मैंने उन्हें कुछ बताया नहीं | शाम के वक़्त मेला ख़तम हो गया और सब लोग अपने-अपने घर चले गए | जब मई घर पंहुचा तो मैंने माँ को अपना चमचा दिखाया | माँ ने कहा ये क्या है ? मैंने उत्तर दिया माँ मैंने मेले से यह ख़रीदा है |

मेरी बात सुन कर माँ बहुत गुस्सा हुई मुझपर, उन्होंने कहा तुमने सुबह से मेले में कुछ नहीं खाया पिया और ये बेकार सा चमचा ले के आये हो | ये चमचा क्यों लिया |

मैंने रोते हुए कहा माँ जब तुम रोटी बनती हो तो तुम्हारे हाथ जल जाते है, तुम्हारे जले हुए हाथ देखकर मुझे बहुत दुःख होता है | मैंने यह चमचा लिया क्युकी इसा इस्तेमाल कर आपका हाथ कभी नहीं जलेगा |

मेरी बात सुनकर मेरी माँ के आँखों में आंसू गए और वह मुझे अपने सीने से लगाकर रोने लगी | और मुझे कहा बीटा तुम बड़े हो गए हो, मई बहुत खुश हु की मुझे तुहारे जैसे बीटा मिला माँ का प्यार |

माँ का प्यार सच्ची कहानी हिंदी इस कहानी से हमे यह सन्देश मिलता है, कि सच्चा प्यार वही होता जहा पर एक दुसरे को समझ सके | बिना कुछ कहे भी दुसरे के दिल की बात जानना और उसे मुसीबत में देखना भी एक प्यार  है | ये बात भगवन ने भी कही है हम हमेशा सभी के पास नहीं हो सकते इसलिए मैंने माँ को बनाया जिसका स्थान मुझसे भी उप्पर है |

अगर आप जिंदगी में सफल होना कहते हो तो हमेशा अपने माता-पिता का आशीर्वाद पाना | उनका आशीर्वाद और प्यार ही एक बेटे के लिए दुनिया का सबसे बड़ा धन होता है |

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