Saturday, April 25, 2020

पिता का बलिदान दिल छूने वाली हिंदी कहानी । Pita ka balidan heart touching Hindi story


पिता का बलिदान दिल छूने वाली हिंदी कहानी दुनिया मे एक बच्चे को माता-पिता से ज़्यादा प्यार करने वाला और कोई नही होता है । अपने बच्चे की खुशी के लिए जो बलिदान माता और पिता देते है, वैसा बलिदान शायद ही कोई दूसरा दे पाए ।




यह कहानी है एक पिता की जिसने अपने बच्चे के खुशी के लिये सबसे बड़ा बलिदान दिया । बदले में बच्चे ने उनके प्यार और बलिदान को कर्तव्य का नाम देके उनके दिल को ठोस पहुँचता है ।

पिता का बलिदान दिल छूने वाली हिंदी कहानी  । Pita ka balidan heart touching Hindi story
पिता का बलिदान


पिता का बलिदान दिल छूने वाली हिंदी कहानी



सभी इंसान अपने जीवन में अपने परिवार के खुशी के लिए खुद को जीवन के हर मोड़ पर अपना बलिदान देते है । परिवार में पिता से बड़ा खुशियों का बलिदान शायद ही कोई और दे सकता है । एक पिता अपने बच्चो के खुशी के लिए खुद को न्योछावर कर उनके खुशियों का महल बनाता है ।



यह कहानी है एक पिता की जो बहुत ही मुस्किलो से अपने परिवार का पेट पालता था। उस पिता की एक प्यारी सी बेटी और आज्ञाकारी पत्नी थी । पिता अपने परिवार से बहुत खुश रहता था ।



उनका सपना था कि वह अपनी बेटी को पढ़ा लिखा के बहुत ही काबिल इंसान बनाय। जिससे जिंदगी में कभी भी उसकी बेटी को दुख का वो महासागर न देखना पड़े जो उसने देखा है । इसलिए एक पिता बहुत मेहनत कर के अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ता है ।


अगर सच्चे सील से कोई काम करो तो वो जरूर पूरा होता है । उस पिता की भगवान ने सुन ली और उसकी लड़की को विदेश जेक पढ़ने का मौका मिला। पिता इतना खुश हुआ कि उसने पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बाटना सुरु कर दिया इस खुशी में कई अब उसकी लड़की विदेश में पढ़ेगी और बहुत काबिल इंसान बनेगी ।



माता-पिता के लगन मेहनत और दुआओं से 4 साल में लड़की एक बहुत बड़ी अफसर बन जाती है । पिता को अपनी लड़की पर बहुत गर्व होता है । उसकी बेटी शादी के लायक हो जाती है, पिता अपनी बेटी की शादी बहुत ही बड़े घर मे तय करता है ।



भगवान भी इंसान के कितने परीक्षा लेता है, जिस घर मे खुशियों का माहौल था, वही ही दुख के बादल छा जाते है । उस पिता के लड़की के सात कुछ ऐसा होता है कि उसे दिखाई देना बंद हो जाता है । उसकी प्यारी से लड़की अंधी हो जाती है । अपनी बेटी को इस हक़त मे देख कर मानो किसान के पैरों तले जमीन खिसक जाती है ।



चिकित्सक को दिखाने के बाद पता चलता है कि, उसकी बेटी को दूसरी आंख लगाना हो गया वरना उसकी लड़की अपने जीवन मे कभी भी नही देख पाएगी । पिता बिना कुछ सोचे आने बेटी का काल उजागर करने के लिए चिकित्सक को बोलता है कि मेरी दोनी आंखे मेरे बेटी को लगा दो । अपने बेटी का काल उजागर करने के लिए पिता आने आंखों का बलिदान दे देता है ।


ऑपरेशन सही होता है और उसकी बेटी वापस से देखने लगती है, लेकिन पिता अपनी दोनों आंखे खो देता है । उसके इस बलिदान से उसकी बेटी का जीवन खुशियी से भर जाता है । पिता ऊनी बेटी की शादी धूम-धाम से करता है । उसे लागत है कि अब उसकी बेटी उसका सहारा बनेगी और आने पिता और अपनी माँ की देख भाल करेगी ।



पिता ने जैसा सोच था , बेटी उससे बिल्कुल अलग निकली उसके बेटी अपने पिता के बलिदान को भूल कर उन्हें अकेला छोड़ कर विदेश वापस से चली जाती है । बिना ये सोचे उसके बूढ़े माता पिता इस बुढ़ापे में कैसे खुद को संभाल पाएंगे । एक पिता जिसकी दोनो आंखे चली गयी हो वह कैसे आने पत्नी और अपना पेट पाल पायेगा ।



पिता को अकेले बहुत ही मुसीबतों का सामना करना पड़ा। अंत मे दोनो आश्रम में चले जाते है । पिता सोचता है कि जिसने अपने बेटी की खुशी के लिए खुद का बलिदान दिया आज वही बेटी उसे छोड़ कर चली गयी ।



किसी ने सही ही कहा जैसी करनी वैसी भरनी, विदेश में उसकी लड़की को एक बेटा होता है । उसका बेटा बचपन से ही अंधा होता है । उसे अपने बेटे को इस हालत में देख कर बहुत बुरा लगता है और वह सोचती है कि उसका बेटा आपनी ज़िन्दगी कैसे जियेगा ।



तभी उस लड़की को अपने अंधे पिता की याद आती है । वह सोचने लगती है मैन मेरे पिता को इतने मुसीबतो में छोड़कर चली गयी थी इसलिए भगवान ने मुझे यह सजा दी है । बेटी बिना कुछ सोचे विदेश से वापस बहरत आ जाती है । और अपने पिता के पास जाकर उसने माफी मांगती है । बेटी आने आप से बहुत शर्मिंदा थी वह पिता के सामने रोने लगती है और उनसे अपने गलतियो की छमा मांगती है ।


बेटी के अंशु देखकर पिता अपनी बेटी को माफ कर देता है । बेटी अपने माता पिता को लेकर विदेश चाकी जाती है और सभी लोग एक साथ रहने लगते है । उपर वाले के घर देर है अंधेर नही, यही होती है दुआओं में शक्ति । उसके बेटे की आंखों की रोशनी वापस आ जाती है ।



लड़की को उस दिन इस बात का एहसास होता है कि हुम् हमारे जीवन मे जैसा करेंगे हमे बादकमे वैसा ही भोगना होगा । बेटी आने पिता के बलिदान को समझ गयी और सभी लोग खुशी से रहने लगे ।



सिख : पिता का बलिदान दिल छूने वाली हिंदी कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि हमे आपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए । वो हमें खुश रखने के लिए खुद का बलिदान देते है हमारा भी यह फर्ज बनता है कि हम आने माता पिता को हमेशा खुश रखे और कभी उनपर आंच न आने दे ।

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